आज का विचार- ‘‘आकाश‘‘

आज का विचार है आकाश ।

आकाश यानि कि ‘‘विस्तार‘‘। आकाश यानि ज्ञान । मुझे लगता है हम आकाश के साथ जिस तरह पेश आते है। आकाश भी हमारे साथ वैसे ही पेश आता है। यदि हमें हमारे जीवन में विस्तार चाहिए, ज्ञान चाहिए, नई सोच चाहिए तो हमें आकाश के प्रति कृतज्ञ होना पड़ेगा। सूर्योदय के समय एवं सूर्यास्त के समय आकाश की ओर देखे एवं अपनी कृतज्ञता व्यक्त करे।

‘‘ज्ञान के विस्तार के लिए आकाश के प्रति कृतज्ञ बनें।‘‘

Sky

Today’s thought is ‘sky’. Sky means expansion. Sky means knowledge. I believe that the sky reciprocates our attitude towards it in the same coin. If we want to expand our horizons of knowledge and rational thinking, then we must express our gratitude towards the sky. We should do it every day at sunrise and sunset.

‘To expand the horizon of knowledge, be grateful to sky.’

Prof. Sanjay Biyani

आज का विचार-‘‘ईर्ष्या‘‘

 ईर्ष्या, यानि जलन हम सब को कभी ना कभी महसूस होती है, क्योंकि हमारे अन्दर अग्नि तत्व अशुद्ध हो गया है । हम अग्नि के प्रति अकृतज्ञ से हो गये है। मुझे लगता है अग्नि हमारे साथ ठीक वैसे ही पेश आती है जैसे हम अग्नि के साथ आते है। आप अग्नि (fire) यानि सूर्य के प्रति अपना (attitude)  बदलिए और अपने अन्दर पवित्रता उत्पन्न करिए।

                           ‘‘अग्नि के प्रति कृतज्ञता का भाव रखे‘‘।

Jealousy

Are we immune to jealousy? At some point in life, we feel the pangs of jealousy at other person’s achievement or well-being. It happens when the fire element in us turns impure due to our ingratitude towards it. This fire treats us the way we treat it. We must inculcate the attitude of gratitude towards fire, that is, Sun. We must purify our inner self.

‘Be grateful to fire.’

Prof. Sanjay Biyani              

आज का विचार – ‘‘धरती‘‘

नमस्कार दोस्तो,
धरती !
हमारे पूरे शरीर में 12 प्रतिशत धरती है। phosphorus, zinc, copper सब हमारे शरीर में है। ये 12 प्रतिशत धरती के तत्व हमारे साथ ठीक वैसे ही पेश आते है जैसे हम धरती के साथ पेश आते है। धरती पर नंगे पाँव चलिए । उसे महसूस करिए। उसके प्रति कृतज्ञ रहिए। मुझे लगता है कि ये धरती हमारे जीवन को बदल कर रख देगी।

‘‘धरती के प्रति कृतज्ञ बने‘‘।

                      Mother Earth

12% of our body is made up of Earth. Phosphorous, zinc, copper – all exist in our body. These elements treat us the way we treat our Mother Earth. Walk barefoot on Earth. Feel its touch. Be grateful to it. I believe Mother Earth can change our life.

Prof. Sanjay Biyani