आज का विचार-‘‘श्रद्धा और डर’’

Share this on :

डॉक्टर और टीचर्स, अक्सर हमें क्यों डराते हैंघ् ये इसलिए डराते हैं क्योंकि आपकी श्रद्धा और विश्वास बहुत कमजोर है और जब भी आपका अपने में डर पैदा हो जाता है तो आपकी दूसरों मे श्रद्धा पैदा हो जाती है विश्वास बढ जाता है और इसी कारण अक्सर आपके अपने टीचर्स या डॉक्टर, आपकी अपनी कमी, यानि अविश्वास, यानि अश्रद्धा के कारण ही आपको डराते हैं।

‘‘अक्सर डॉक्टर और टीचर्स हमें इसलिए डराते हैं ताकि हमारा स्वयं के प्रति अविश्वास और उनके प्रति विश्वास पैदा हो जाए।’’

Why do doctors and teachers often frighten us? They frighten us because our devotion and faith are very weak and whenever you get frightened then your devotion is raised in others and faith increases and due to this your own teachers and doctors frighten you because of your own lack of faith and devotion.

“Usually doctors and teachers frighten us so that our faith in them increases and we lose faith in ourselves”

Dr. Sanjay Biyani

Share this on :

आज का विचार-‘‘संस्कृति’’

Share this on :

दूसरे के खाने को मैं खा जाऊँ, ये प्रकृति एक प्रकार की विकृति है। दूसरा अपना खाना खाएँ मैं अपना खाना खाऊँ ये प्रकृति है, लेकिन दूसरे ने खाना नहीं खाया इसी की फिक्र करना यही हमारी संस्कृति है।

‘‘दूसरों के भोजन की भी चिंता करना हमारी संस्कृति है।’’

Culture

To cheat somebody of his rightful share (of food, property, assets etc) is not human nature. I consume my food, enjoy my assets & you consume your food, enjoy your assets – this is human nature. But we help the other person & feed his empty stomach – this is our culture.

Caring for the other is our culture.

Prof. Sanjay Biyani

Share this on :

आज का विचार-‘‘स्वः प्रबंधन’’

Share this on :

आज आप पहली बार गाडी में बैठे हैं, बहुत डरे हुए हैं, आपको क्लच एवं गियर मंे संतुलन करना नही आ रहा है। आप घबराए हुए हैं ठीक इसी तरह से अगर आप अपने च्तंबजपबंस स्पमि में भी डर रहे हैं तो इसका सीधा सा मतलब है कि आपको स्वयं को डंदंहम करना अभी नही आया है।

‘‘हमारे डर का कारण सेल्फ मैनेजमेन्ट की कमी है।’’

Self-management

When you get behind the wheel for the first time, you have a natural fear of a mishap. Why? Because you have a difficulty in synchronizing the clutch-gear functioning. Similarly, if you have a fear in your practical life, it means you lack effective self-management.

Lack of self management induces fear in our life.

Prof. Sanjay Biyani

Share this on :

आज का विचार-‘‘स्वास्थ्य’’

Share this on :

आज का विचार यह है कि, असत्य से अस्वस्थ व सत्य से स्वास्थ्य का कोई सम्बन्ध हैघ् …..देखिए ना जब हम असत्य बोलते हैं, तो हमारी पल्सरेट हाई हो जाती है, हमारा ब्लड प्रेशर हाई हो जाता है और डॉक्टर भी तो यही कहते हैं कि ज्यादातर रोग अनो शारीरिक है। मन से शुरू होते हैं एवं शरीर को जकड लेते हैं, यानि कितना आसान है कि सत्य बोलिए और स्वस्थ रहिए।


‘‘सत्य बोलिए और स्वस्थ रहिये।’’

Health

Does telling lies make us ill? Does speaking truth make us healthy? Yes, our health has a connection with lies and truth. When we lie, our pulse rate and blood pressure go up. Doctors also say that most ailments have their genesis in our mind. So always speak the truth and stay healthy.  

Speak the truth and stay healthy.

Prof. Sanjay Biyani

 

Share this on :

आज का विचार-‘‘शत्रु’’

Share this on :

आज का विचार यह है कि, हमें अपने शत्रुओं को धन्यवाद देना चाहिए। आप सोच रहे होगें कि शत्रुओं को धन्यवाद!….हाँ भई हाँ! क्योंकि हम अपने मित्रों से इतना नही सीख पाते जितना अपने शत्रुओं से सीख लेते हैं! क्योंघ्….सही है ना बात
‘‘हम अपने मित्रों से इतना नहीं सीख पाते जितना अपने
शत्रु से सीख पाते हैं। अतः अपने शत्रुओं को
धन्यवाद दें क्योंकि असल में वो ही आपको अधिक सिखाते हैं।’’

Enemy

One must always be thankful to his enemies and opponents. Why do I say so? Because we learn more from our opponents than from friends. Think over it and you will agree.

Be grateful to your enemies for the lessons they teach you.

Prof. Sanjay Biyani

Share this on :

आज का विचार-‘‘प्रगति’’

Share this on :

कभी आपने सोचा है कि नदी और तालाब में क्या फर्क है नदी बहती रहती है और सागर में जाकर मिल जाती है, क्योंकि नदी के जो दो किनारे हैं, उसमें एक सुखद है, एक दुखद है लेकिन तालाब के तो चारों किनारें ही एक हैं सुखद, दुखद और सुखद….मुझे लगता है कि हमारे जीवन में सुःख व दुःख दोनों से मिलकर बनता है उसी से हमें प्रगति मिलती है एवं उसी से हम जीवन में ऊँचाइयों को छू पाते हैं।
‘‘जीवन में में प्रगति के लिए सुख-दुख
दोनों का ही होना अति आवश्यक है।’’

Progress

How do we make progress in life? By overcoming hardships and sorrows. Just as a river has two banks, our life has happiness and sorrow as its integral parts. We scale heights, achieve success only by overcoming our failures.  

Both happiness and sorrow are essential for making progress in life.

Prof. Sanjay Biyani

Share this on :

आज का विचार-‘‘फूल और काँटे’’

Share this on :

कुछ लोग फूल को देखते हैं, और देखकर बोलते हैं वाह भई वाह क्या फूल हैघ् ….हाँ थोडे बहुत काँटे हैं, लेकिन इस फूल की सुरक्षा के लिए आवश्यक भी हैं और दूसरी जगह कुछ लोग कहते हैं कि अरे क्या फूल, काँटे ही काँटे, फूल तो सिर्फ दिखावे का है। आप सोचिए कि, आप कैसे सोचते हैंघ् पोजेटिव सोचते हैं या नेगेटिव सोचते हैं।
‘‘जीवन में हम पर यह बात निर्भर करती है
कि हम कैसा सोचें, पोजेटिव या नेगेटिव’’

Flowers and thorns

Some people look at a flower and praise its beauty. They understand that thorns exist to protect flowers. But others criticize thorns, instead of enjoying the flower’s beauty. The flowers and the thorns have always been together. Which side to look at entirely depends on your outlook. So develop a positive attitude in life.

Positive attitude makes life easy and happy.

 Prof. Sanjay Biyani

Share this on :

आज का विचार-‘‘तलाक’’

Share this on :

 

कुछ लोग कहते हैं कि हमारे समाज में तलाक की घटनाऐं बहुत बढ रही है। ऐसा क्यों होता हैघ् मैं आपको बताता हूँ, हजारों साल बाद स्त्रियों की पहली पीढी घर से बाहर काम करने गई है और इसी कारण वे अपने रिश्तों में संतुलन नही बना पा रहे हैं। अगर हम चाहते हैं कि ऐसी घटनाएँ कम हो तो स्त्री एवं पुरूष को एक दूसरे को समझना ही होगा।
‘‘तलाक का असली कारण हजारों वर्षों बाद स्त्री का घर से बाहर
जाकर काम करना है, इसे रोकने के लिए आपसी समझ बनानी पडेगी’’

Divorce

Divorce cases are rising in the society. It is a matter of concern. For thousands of years, women were confined to the four walls of the house. Now they are stepping out to work, to seek equality in the society. As a result, the couples are not able to maintain a work-life balance. One can avoid bitterness in a marital relationship by giving an equal weight age to the aspirations of his partner.

With women giving priority to work over household chores, divorces are rising. A better understanding between a
husband and a wife can reduce bitterness in their relationship.

Prof. Sanjay Biyani

Share this on :

आज का विचार-‘‘अनासक्त कर्म’’

Share this on :


श्री कृष्ण का अनासक्त कर्मयोग हमें भला क्यों समझ नहीं आता हैघ् मैं आपको आइडिया देता हूँ आप प्रतिदिन एकाएक बिना फल की इच्छा से करिये और महसूस करिये आपको अनासक्त कर्म ठीक से समझ आ जायेगा।

‘‘अगर हम कृष्ण के अनासक्त कर्म को समझना चाहते हैं,
तो हमें प्रतिदिन कोई एक कर्म बिना फल की इच्छा से करना होगा।’’

Action with detachment

What is the best way to understand Lord Krishna’s ‘Karmayog’? Every day, if you do one task without the desire for the result, you will gradually understand the essence of Karmayog.  

We must act with detachment to understand
Lord Krishna’s Karmayog.

 

Prof. Sanjay Biyani

Share this on :

आज का विचार-‘‘सम्मान और अपमान’’

Share this on :

देखिए अक्सर लोग सम्मान ना मिलने पर अपमानित महसूस करते हैं। ऐसा क्योघ् …..ऐसा इसलिए होता है कि हम स्वयं का सम्मान नही करते और हम अपमानित महसूस करते हैं। आप स्वयं का सम्मान करें फिर भला कौन आपको अपमानित कर सकता है।

‘‘हम सम्मान न होने पर अपमानित इसलिए महसूस करते हैं,
क्योंकि हम स्वयं को सम्मानित ही नही समझते।’’

Honor and humiliation

One feels insulted at not being valued by others. Why does it happen? Because one doesn’t have respect for himself. If we respect ourselves, nobody can insult us.

First we must have regard for ourselves,
only then will others respect us.

 

Prof. Sanjay Biyani

Share this on :