आज का विचार-‘‘श्रद्धा और डर’’

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डॉक्टर और टीचर्स, अक्सर हमें क्यों डराते हैंघ् ये इसलिए डराते हैं क्योंकि आपकी श्रद्धा और विश्वास बहुत कमजोर है और जब भी आपका अपने में डर पैदा हो जाता है तो आपकी दूसरों मे श्रद्धा पैदा हो जाती है विश्वास बढ जाता है और इसी कारण अक्सर आपके अपने टीचर्स या डॉक्टर, आपकी अपनी कमी, यानि अविश्वास, यानि अश्रद्धा के कारण ही आपको डराते हैं।

‘‘अक्सर डॉक्टर और टीचर्स हमें इसलिए डराते हैं ताकि हमारा स्वयं के प्रति अविश्वास और उनके प्रति विश्वास पैदा हो जाए।’’

Why do doctors and teachers often frighten us? They frighten us because our devotion and faith are very weak and whenever you get frightened then your devotion is raised in others and faith increases and due to this your own teachers and doctors frighten you because of your own lack of faith and devotion.

“Usually doctors and teachers frighten us so that our faith in them increases and we lose faith in ourselves”

Dr. Sanjay Biyani

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आज का विचार-‘‘प्रगति’’

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कभी आपने सोचा है कि नदी और तालाब में क्या फर्क है नदी बहती रहती है और सागर में जाकर मिल जाती है, क्योंकि नदी के जो दो किनारे हैं, उसमें एक सुखद है, एक दुखद है लेकिन तालाब के तो चारों किनारें ही एक हैं सुखद, दुखद और सुखद….मुझे लगता है कि हमारे जीवन में सुःख व दुःख दोनों से मिलकर बनता है उसी से हमें प्रगति मिलती है एवं उसी से हम जीवन में ऊँचाइयों को छू पाते हैं।
‘‘जीवन में में प्रगति के लिए सुख-दुख
दोनों का ही होना अति आवश्यक है।’’

Progress

How do we make progress in life? By overcoming hardships and sorrows. Just as a river has two banks, our life has happiness and sorrow as its integral parts. We scale heights, achieve success only by overcoming our failures.  

Both happiness and sorrow are essential for making progress in life.

Prof. Sanjay Biyani

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आज का विचार-‘‘फूल और काँटे’’

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कुछ लोग फूल को देखते हैं, और देखकर बोलते हैं वाह भई वाह क्या फूल हैघ् ….हाँ थोडे बहुत काँटे हैं, लेकिन इस फूल की सुरक्षा के लिए आवश्यक भी हैं और दूसरी जगह कुछ लोग कहते हैं कि अरे क्या फूल, काँटे ही काँटे, फूल तो सिर्फ दिखावे का है। आप सोचिए कि, आप कैसे सोचते हैंघ् पोजेटिव सोचते हैं या नेगेटिव सोचते हैं।
‘‘जीवन में हम पर यह बात निर्भर करती है
कि हम कैसा सोचें, पोजेटिव या नेगेटिव’’

Flowers and thorns

Some people look at a flower and praise its beauty. They understand that thorns exist to protect flowers. But others criticize thorns, instead of enjoying the flower’s beauty. The flowers and the thorns have always been together. Which side to look at entirely depends on your outlook. So develop a positive attitude in life.

Positive attitude makes life easy and happy.

 Prof. Sanjay Biyani

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आज का विचार-‘‘सम्मान और अपमान’’

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देखिए अक्सर लोग सम्मान ना मिलने पर अपमानित महसूस करते हैं। ऐसा क्योघ् …..ऐसा इसलिए होता है कि हम स्वयं का सम्मान नही करते और हम अपमानित महसूस करते हैं। आप स्वयं का सम्मान करें फिर भला कौन आपको अपमानित कर सकता है।

‘‘हम सम्मान न होने पर अपमानित इसलिए महसूस करते हैं,
क्योंकि हम स्वयं को सम्मानित ही नही समझते।’’

Honor and humiliation

One feels insulted at not being valued by others. Why does it happen? Because one doesn’t have respect for himself. If we respect ourselves, nobody can insult us.

First we must have regard for ourselves,
only then will others respect us.

 

Prof. Sanjay Biyani

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आज का विचार-‘‘मौन‘‘

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नमस्कार दोस्तो,
हम कई बार लोगों को बातें समझाते है, परन्तु उन्हें समझ नहीं आती। जब हम वाणी से थक जाते है तो मैं आपको एक आइडिया दूंगा, आप दूसरी भाषा का इस्तेमाल करें और वो भाषा है, ‘‘मौन’’ की भाषा, जो कि बहुत गहरी है। वाणी मस्तिष्क तक जाती है, परन्तु मौन दिल तक दस्तक देता है। आजमाइये और देखिए मौन की भाषा एवं उसका असर।
‘‘जो बात वाणी से नहीं समझाई जा सकती,
वो मौन से आसानी से समझाई जा सकती है।’’

Silence

Many times, we explain something but people don’t understand that. Here, I can help you. When words fail, resort to silence. Sound reaches mind, silence touches heart. Use silence and experience its power.

‘Silence conveys what words can’t’.

Prof. Sanjay Biyani

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आज का विचार-‘‘खुद को बदलें, दूसरों को नही‘‘

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नमस्कार दोस्तो,
कल्पना करिये, आपके घर में आपके ही जैसा एक और व्यक्त्ति आ जाए, तो क्या आप इतने आराम से रह सकेंगें? नही ना…………. तो फिर आप ये कोशिश क्यों करते है कि सभी व्यक्त्ति आप जैसे हो जाये, ये 700 करोड़ लोगों की अपनी दुनिया सभी व्यक्त्ति अलग-अलग तरह के हैं। आइये हम उन सभी लोंगों का आदर करें, एवं यदि बदलना हो तो खुद को बदलने पर ही ध्यान दें।
‘‘हर व्यक्त्ति अद्वितीय है,
दूसरो को बदलने के बजाय स्वयं को बदलने का प्रयास करें।’’

Change Yourself, Not Others

Imagine that a lookalike of yours comes to live with you. Will you be able to live peacefully then? Certainly not. Then why do you want people to change and be like you. Around 700 crore people live on this Earth. Let’s respect them all. If need arises, we should try to change ourselves.

‘Every human being is unique. Change yourself, not others.’

Prof. Sanjay Biyani

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आज का विचार-‘‘खुशी‘‘

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अक्सर हम लोग दूसरों को खुश करने की कोशिश करते है पर दूसरे तो खुश होते नहीं। जरा सोचिए। ऐसा क्यों होता है ? मैं बताता हूँ आपको। आप जब तक खुद खुश नहीं होंगे तब तक दूसरों को खुश नहीं कर सकते। इसलिए अगर ध्यान देना है तो खुद की खुशी पर ध्यान दीजिए क्योंकि आपके खुश होने से सब अपने आप ही खुश हो जाएंगे।

‘आपके खुश होने से सभी खुश रहेंगे‘‘।

Happiness

Most of our works are aimed at making others happy. But others rarely become happy. Ever thought why it happens? Actually, you can’t make others happy until you are happy. So always channelize your energies towards making yourself happy.

‘If you are happy, others will also be happy with you.’

Prof. Sanjay Biyani

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आज का विचार-‘‘दुःख‘‘

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अगर आपके सिर पर घाव हो जाए, तो इंदकंहम घाव पर लगाएंगे या शीशे में देखकर शीशे पर लगाएंगे। आप कहेंगे नहीं। हम घाव पर लगाएंगे। तो भाई जब आप दुखी है तो आप दूसरों को क्यों ठीक करना चाहते है। आपको अगर खुद के दुखों को ठीक करना है तो दूसरों पर नहीं खुद पर काम करना होगा।

‘अगर आप दुःखी है तो दूसरो पर नहीं खुद पर काम करना पड़ेगा‘‘।

Unhappiness

You have an injury on your head. You are standing before a mirror. Where will you put the bandage: On your head, or on the reflection in the mirror? Of course on the head.

So when you are unhappy, why do you want to change others? If you want to reduce your sorrows, then work on yourself, not others.  

Prof. Sanjay Biyani

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आज का विचार-‘‘वायु‘‘

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Air

नमस्कार दोस्तो,
आज का विचार है वायु के लिए। हमारे पूरे शरीर में 6 प्रतिशत वायु है जो बह रही है। ऊपर से नीचे, नीचे से ऊपर और ये वायु हमारे साथ ठीक वैसे ही पेश आती है जैसे हम वायु के साथ पेश आते है। वायु के प्रति कृतज्ञ बनिए। गहरी श्वास लीजिए और अपनी प्रकृति को प्रदुषित होने से बचाइये।

‘‘वायु के प्रति कृतज्ञ बनें, प्रकृति को वायु प्रदुषण से बचाये‘‘।

Air

Good day friends,

Today’s thought is about air. Our body has 6% air, flowing from top to bottom, and vice versa. Air treats us the way we treat it. So be grateful to air. Save the environment from pollution.   

Prof. Sanjay Biyani

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आज का विचार-‘‘प्रेम‘‘

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http://sanjaybiyani.com/

नमस्कार दोस्तो,
आजकल हम सब लोग एक समस्या से गुजर रहे हैं हम सब लोगों को बहुत गुस्सा आता है। लाल-पीले हो जाते है। कभी आपने सोचा है ये गुस्सा क्यों आता है ?
गुस्सा इसलिए आता है कि हमारे जीवन में एक चीज की कमी हो गई है और वो चीज है ‘‘प्रेम‘‘! जिसका मतलब है देने की भावना। जैसे-जैसे प्रेम बढ़ता जाएगा, वैसे-वैसे गुस्सा दूर होता जाएगा।

‘‘जीवन में जैसे प्रेम बढ़ेगा, गुस्सा कम होता जाएगा‘‘।

Love

Good day friends,

These days, inability to control one’s anger has become a big problem. On petty things, we get angry. Have you ever thought why it happens?

We get angry because there is no love in our life. Love means willingness to give. As love increases, anger vanishes.

‘Increase love in life, and rid yourself of anger’

Prof. Sanjay Biyani


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