आज का विचार-‘‘चोरी’’

theft

 

अष्टांग योग में एक शब्द आता है अस्तेय अर्थात् चोरी न करना। कुछ लोग कहते हैं मैंने छोटी चोरी की है और दूसरे ने बडी चोरी की है। मुझे लगता है छोटी और बडी चोरी नही होती ये तो अवसर होता है जिसे बडा अवसर मिला उसने बडी चोरी की, जिसे छोटा अवसर मिला उसने छोटी चोरी की। चोरी-चोरी है वह मन को समान रूप से ही खराब करती है।

‘‘चोरी कभी छोटी या बडी नही होती, छोटा बडा तो महज अवसर होता है। मन तो दोनों से ही खराब होता है’’

 

Theft

In Ashtanga Yog comes a term ‘Asteya’ which means ‘don’t steal’. A person may seek some reprieve saying that he stole a minor thing while the other one was guilty of a major theft. Theft is theft, whether minor or major. It is all about a chance. One who gets a chance to steal something minor steals the minor thing. Had he got a chance to commit a major theft, he would have definitely done it. A theft – small or big – harms one’s conscience equally.

Theft is a theft, whether minor or major. It harms one’s conscience.

Prof. Sanjay Biyani