आज का विचार-‘‘खुद को बदलें, दूसरों को नही‘‘

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नमस्कार दोस्तो,
कल्पना करिये, आपके घर में आपके ही जैसा एक और व्यक्त्ति आ जाए, तो क्या आप इतने आराम से रह सकेंगें? नही ना…………. तो फिर आप ये कोशिश क्यों करते है कि सभी व्यक्त्ति आप जैसे हो जाये, ये 700 करोड़ लोगों की अपनी दुनिया सभी व्यक्त्ति अलग-अलग तरह के हैं। आइये हम उन सभी लोंगों का आदर करें, एवं यदि बदलना हो तो खुद को बदलने पर ही ध्यान दें।
‘‘हर व्यक्त्ति अद्वितीय है,
दूसरो को बदलने के बजाय स्वयं को बदलने का प्रयास करें।’’

Change Yourself, Not Others

Imagine that a lookalike of yours comes to live with you. Will you be able to live peacefully then? Certainly not. Then why do you want people to change and be like you. Around 700 crore people live on this Earth. Let’s respect them all. If need arises, we should try to change ourselves.

‘Every human being is unique. Change yourself, not others.’

Prof. Sanjay Biyani

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आज का विचार-‘‘खुशी‘‘

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अक्सर हम लोग दूसरों को खुश करने की कोशिश करते है पर दूसरे तो खुश होते नहीं। जरा सोचिए। ऐसा क्यों होता है ? मैं बताता हूँ आपको। आप जब तक खुद खुश नहीं होंगे तब तक दूसरों को खुश नहीं कर सकते। इसलिए अगर ध्यान देना है तो खुद की खुशी पर ध्यान दीजिए क्योंकि आपके खुश होने से सब अपने आप ही खुश हो जाएंगे।

‘आपके खुश होने से सभी खुश रहेंगे‘‘।

Happiness

Most of our works are aimed at making others happy. But others rarely become happy. Ever thought why it happens? Actually, you can’t make others happy until you are happy. So always channelize your energies towards making yourself happy.

‘If you are happy, others will also be happy with you.’

Prof. Sanjay Biyani

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आज का विचार-‘‘दुःख‘‘

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अगर आपके सिर पर घाव हो जाए, तो इंदकंहम घाव पर लगाएंगे या शीशे में देखकर शीशे पर लगाएंगे। आप कहेंगे नहीं। हम घाव पर लगाएंगे। तो भाई जब आप दुखी है तो आप दूसरों को क्यों ठीक करना चाहते है। आपको अगर खुद के दुखों को ठीक करना है तो दूसरों पर नहीं खुद पर काम करना होगा।

‘अगर आप दुःखी है तो दूसरो पर नहीं खुद पर काम करना पड़ेगा‘‘।

Unhappiness

You have an injury on your head. You are standing before a mirror. Where will you put the bandage: On your head, or on the reflection in the mirror? Of course on the head.

So when you are unhappy, why do you want to change others? If you want to reduce your sorrows, then work on yourself, not others.  

Prof. Sanjay Biyani

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आज का विचार-‘‘वायु‘‘

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Air

नमस्कार दोस्तो,
आज का विचार है वायु के लिए। हमारे पूरे शरीर में 6 प्रतिशत वायु है जो बह रही है। ऊपर से नीचे, नीचे से ऊपर और ये वायु हमारे साथ ठीक वैसे ही पेश आती है जैसे हम वायु के साथ पेश आते है। वायु के प्रति कृतज्ञ बनिए। गहरी श्वास लीजिए और अपनी प्रकृति को प्रदुषित होने से बचाइये।

‘‘वायु के प्रति कृतज्ञ बनें, प्रकृति को वायु प्रदुषण से बचाये‘‘।

Air

Good day friends,

Today’s thought is about air. Our body has 6% air, flowing from top to bottom, and vice versa. Air treats us the way we treat it. So be grateful to air. Save the environment from pollution.   

Prof. Sanjay Biyani

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आज का विचार-‘‘प्रेम‘‘

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http://sanjaybiyani.com/

नमस्कार दोस्तो,
आजकल हम सब लोग एक समस्या से गुजर रहे हैं हम सब लोगों को बहुत गुस्सा आता है। लाल-पीले हो जाते है। कभी आपने सोचा है ये गुस्सा क्यों आता है ?
गुस्सा इसलिए आता है कि हमारे जीवन में एक चीज की कमी हो गई है और वो चीज है ‘‘प्रेम‘‘! जिसका मतलब है देने की भावना। जैसे-जैसे प्रेम बढ़ता जाएगा, वैसे-वैसे गुस्सा दूर होता जाएगा।

‘‘जीवन में जैसे प्रेम बढ़ेगा, गुस्सा कम होता जाएगा‘‘।

Love

Good day friends,

These days, inability to control one’s anger has become a big problem. On petty things, we get angry. Have you ever thought why it happens?

We get angry because there is no love in our life. Love means willingness to give. As love increases, anger vanishes.

‘Increase love in life, and rid yourself of anger’

Prof. Sanjay Biyani


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आज का विचार -‘‘इच्छा‘‘

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लोग अक्सर कहा करते है कि इच्छाएँ दुःखों का कारण हैं। अगर वास्तव में इच्छाएँ दुख का कारण है तो फिर आपका जन्म इच्छा के कारण है एवं ईश्वर से मिलन भी इच्छा के कारण ही है तो फिर इच्छा समस्या का कारण क्यों है ?
बिना सोचे -समझे अज्ञानता से जुड़ी इच्छा हमारे दुःखो का कारण है।

‘‘इच्छा दुःखों का कारण नहीं बल्कि अज्ञान से जुड़ी इच्छा दुःखों का कारण है।‘‘

Desire

People often say: Desires are the root cause of all miseries. But see, you are a product of a desire only. You can attain salvation only if you desire it strongly. Then how can a desire be a problem? Actually, desires arising out of our ignorance are the root cause of our miseries.

    Prof. Sanjay Biyani

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आज का विचार- ‘‘आकाश‘‘

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आज का विचार है आकाश ।

आकाश यानि कि ‘‘विस्तार‘‘। आकाश यानि ज्ञान । मुझे लगता है हम आकाश के साथ जिस तरह पेश आते है। आकाश भी हमारे साथ वैसे ही पेश आता है। यदि हमें हमारे जीवन में विस्तार चाहिए, ज्ञान चाहिए, नई सोच चाहिए तो हमें आकाश के प्रति कृतज्ञ होना पड़ेगा। सूर्योदय के समय एवं सूर्यास्त के समय आकाश की ओर देखे एवं अपनी कृतज्ञता व्यक्त करे।

‘‘ज्ञान के विस्तार के लिए आकाश के प्रति कृतज्ञ बनें।‘‘

Sky

Today’s thought is ‘sky’. Sky means expansion. Sky means knowledge. I believe that the sky reciprocates our attitude towards it in the same coin. If we want to expand our horizons of knowledge and rational thinking, then we must express our gratitude towards the sky. We should do it every day at sunrise and sunset.

‘To expand the horizon of knowledge, be grateful to sky.’

Prof. Sanjay Biyani

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आज का विचार-‘‘ईर्ष्या‘‘

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 ईर्ष्या, यानि जलन हम सब को कभी ना कभी महसूस होती है, क्योंकि हमारे अन्दर अग्नि तत्व अशुद्ध हो गया है । हम अग्नि के प्रति अकृतज्ञ से हो गये है। मुझे लगता है अग्नि हमारे साथ ठीक वैसे ही पेश आती है जैसे हम अग्नि के साथ आते है। आप अग्नि (fire) यानि सूर्य के प्रति अपना (attitude)  बदलिए और अपने अन्दर पवित्रता उत्पन्न करिए।

                           ‘‘अग्नि के प्रति कृतज्ञता का भाव रखे‘‘।

Jealousy

Are we immune to jealousy? At some point in life, we feel the pangs of jealousy at other person’s achievement or well-being. It happens when the fire element in us turns impure due to our ingratitude towards it. This fire treats us the way we treat it. We must inculcate the attitude of gratitude towards fire, that is, Sun. We must purify our inner self.

‘Be grateful to fire.’

Prof. Sanjay Biyani              

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आज का विचार – ‘‘धरती‘‘

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नमस्कार दोस्तो,
धरती !
हमारे पूरे शरीर में 12 प्रतिशत धरती है। phosphorus, zinc, copper सब हमारे शरीर में है। ये 12 प्रतिशत धरती के तत्व हमारे साथ ठीक वैसे ही पेश आते है जैसे हम धरती के साथ पेश आते है। धरती पर नंगे पाँव चलिए । उसे महसूस करिए। उसके प्रति कृतज्ञ रहिए। मुझे लगता है कि ये धरती हमारे जीवन को बदल कर रख देगी।

‘‘धरती के प्रति कृतज्ञ बने‘‘।

                      Mother Earth

12% of our body is made up of Earth. Phosphorous, zinc, copper – all exist in our body. These elements treat us the way we treat our Mother Earth. Walk barefoot on Earth. Feel its touch. Be grateful to it. I believe Mother Earth can change our life.

Prof. Sanjay Biyani

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आज का विचार ‘‘देश‘‘

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नमस्कार दोस्तो,
देखिए, हम सब चाहते हैं कि हमारा देश महान बने। चाहते है ना! अगर हम चाहते हैं कि हमारा देश सचमुच महान् बने तो हमें यहाँ आदमी को महान बनने के अवसर देने होंगे और उन सब परिस्थितियों को बंद करना पड़ेगा जिसके कारण इंसान को बार-बार रोका जाता है।
‘‘देश को महान बनाने के लिए हर इंसान को महान बनना होगा‘‘।

                            Country

Good day friends,

We want to make our country great. Isn’t it? It can happen if wecreate opportunities to make every individual great. We must create conducive environment for unhindered progress of every human being.

To make country great, everybody will have to become great.

Prof. Sanjay Biyani 

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