आज का विचार-‘‘फूल और काँटे’’

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कुछ लोग फूल को देखते हैं, और देखकर बोलते हैं वाह भई वाह क्या फूल हैघ् ….हाँ थोडे बहुत काँटे हैं, लेकिन इस फूल की सुरक्षा के लिए आवश्यक भी हैं और दूसरी जगह कुछ लोग कहते हैं कि अरे क्या फूल, काँटे ही काँटे, फूल तो सिर्फ दिखावे का है। आप सोचिए कि, आप कैसे सोचते हैंघ् पोजेटिव सोचते हैं या नेगेटिव सोचते हैं।
‘‘जीवन में हम पर यह बात निर्भर करती है
कि हम कैसा सोचें, पोजेटिव या नेगेटिव’’

Flowers and thorns

Some people look at a flower and praise its beauty. They understand that thorns exist to protect flowers. But others criticize thorns, instead of enjoying the flower’s beauty. The flowers and the thorns have always been together. Which side to look at entirely depends on your outlook. So develop a positive attitude in life.

Positive attitude makes life easy and happy.

 Prof. Sanjay Biyani

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आज का विचार-‘‘तलाक’’

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कुछ लोग कहते हैं कि हमारे समाज में तलाक की घटनाऐं बहुत बढ रही है। ऐसा क्यों होता हैघ् मैं आपको बताता हूँ, हजारों साल बाद स्त्रियों की पहली पीढी घर से बाहर काम करने गई है और इसी कारण वे अपने रिश्तों में संतुलन नही बना पा रहे हैं। अगर हम चाहते हैं कि ऐसी घटनाएँ कम हो तो स्त्री एवं पुरूष को एक दूसरे को समझना ही होगा।
‘‘तलाक का असली कारण हजारों वर्षों बाद स्त्री का घर से बाहर
जाकर काम करना है, इसे रोकने के लिए आपसी समझ बनानी पडेगी’’

Divorce

Divorce cases are rising in the society. It is a matter of concern. For thousands of years, women were confined to the four walls of the house. Now they are stepping out to work, to seek equality in the society. As a result, the couples are not able to maintain a work-life balance. One can avoid bitterness in a marital relationship by giving an equal weight age to the aspirations of his partner.

With women giving priority to work over household chores, divorces are rising. A better understanding between a
husband and a wife can reduce bitterness in their relationship.

Prof. Sanjay Biyani

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आज का विचार-‘‘अनासक्त कर्म’’

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श्री कृष्ण का अनासक्त कर्मयोग हमें भला क्यों समझ नहीं आता हैघ् मैं आपको आइडिया देता हूँ आप प्रतिदिन एकाएक बिना फल की इच्छा से करिये और महसूस करिये आपको अनासक्त कर्म ठीक से समझ आ जायेगा।

‘‘अगर हम कृष्ण के अनासक्त कर्म को समझना चाहते हैं,
तो हमें प्रतिदिन कोई एक कर्म बिना फल की इच्छा से करना होगा।’’

Action with detachment

What is the best way to understand Lord Krishna’s ‘Karmayog’? Every day, if you do one task without the desire for the result, you will gradually understand the essence of Karmayog.  

We must act with detachment to understand
Lord Krishna’s Karmayog.

 

Prof. Sanjay Biyani

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आज का विचार-‘‘सम्मान और अपमान’’

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देखिए अक्सर लोग सम्मान ना मिलने पर अपमानित महसूस करते हैं। ऐसा क्योघ् …..ऐसा इसलिए होता है कि हम स्वयं का सम्मान नही करते और हम अपमानित महसूस करते हैं। आप स्वयं का सम्मान करें फिर भला कौन आपको अपमानित कर सकता है।

‘‘हम सम्मान न होने पर अपमानित इसलिए महसूस करते हैं,
क्योंकि हम स्वयं को सम्मानित ही नही समझते।’’

Honor and humiliation

One feels insulted at not being valued by others. Why does it happen? Because one doesn’t have respect for himself. If we respect ourselves, nobody can insult us.

First we must have regard for ourselves,
only then will others respect us.

 

Prof. Sanjay Biyani

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आज का विचार-‘‘श्रद्धा और डर’’

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डॉक्टर और टीचर्स, अक्सर हमें क्यों डराते हैंघ् ये इसलिए डराते हैं क्योंकि आपकी श्रद्धा और विश्वास बहुत कमजोर है और जब भी आपका अपने में डर पैदा हो जाता है तो आपकी दूसरों मे श्रद्धा पैदा हो जाती है विश्वास बढ जाता है और इसी कारण अक्सर आपके अपने टीचर्स या डॉक्टर, आपकी अपनी कमी, यानि अविश्वास, यानि अश्रद्धा के कारण ही आपको डराते हैं।
‘‘अक्सर डॉक्टर और टीचर्स हमें इसलिए डराते हैं ताकि हमारा स्वयं के प्रति अविश्वास और उनके प्रति विश्वास पैदा हो जाए।’’

Faith and fear

Why do doctors and teachers induce fear in us? They do so because our faith in ourselves is too weak. When we have fear, our faith in others increases. Doctors and teachers exploit our fears to gain our trust.

Often, doctors and teachers induce fear
in us to gain our trust in them.

Prof. Sanjay Biyani

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आज का विचार-‘‘रिश्तों की मर्यादा’’

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आज का विचार है कि, सार्वजनिक स्थानों पर आज का युवा प्यार का इजहार करते हुए बडे, अजीबों, गरीब हरकतें करते देखे जाते हैं…….क्या यह ठीक हैघ् देखिए एक जानवर अपने आपको, जानवर समझता है शरीर समझता इसलिए जो इच्छा हो वो करता है, परन्तु आप इंसान हैं, आपकी भावनाएँ हैं, इमोशंस है, रिश्तों की मर्यादा रखिए नही तो फिर कुछ समय बाद पछताना पड सकता है।

‘‘सार्वजनिक स्थानों पर प्रेम का इजहार करने से बचें।’’

Sanctity of relationships

These days, youngsters can be seen indulging in, popularly called, ‘PDA’ (public display of affection). Is it acceptable to show physical intimacy to a partner at a public place? An animal does what it feels like because it considers itself just a body. But a person has feelings, emotions and dignity. If we don’t uphold the sanctity of our relationships in public, we may have to regret later on.

Avoid physical display of your love for
your partner at a public place.

 

Prof. Sanjay Biyani

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आज का विचार-‘‘ध्यान‘‘

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नमस्कार दोस्तो,

हम अपना ध्यान लगाये तो लगाये कहाँ? कोई कहता है, आज्ञा चक्र पर लगाइये और कोई कहता है कि हृदय पर लगाइये। मुझे लगता है कि अगर आपको अपने जीवन में प्रेम को बढ़ाना है तो आपको ध्यान, हृदय यानि अनाहद चक्र पर ध्यान लगाना होगा और यदि आपको युद्ध जीतना है या तार्किक बनना है, तो फिर आपको आज्ञा चक्र पर ध्यान लगाना चाहिए।

‘‘जीवन में प्रेम बढ़ाने के लिए हृदय अर्थात् अनाहद चक्र पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए
और तार्किक शक्ति बढ़ाने के लिए बुद्धि अर्थात् आज्ञा चक्र पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।’’

Meditation

Good day friends,

Where should we focus during mediation: On ‘Aagya Chakra’ or on ‘Hridaya Chakra’? I believe that one should focus on Aagya Chakra to sharpen his logic or to win a battle. If one wants to increase love in his life, he needs to focus on Hridaya Chakra.

‘Focus on Aagya Chakra to sharpen logic, and on Hridaya Chakra to increase love in life’

Prof. Sanjay Biyani

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आज का विचार-‘‘आसक्ति’’

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हम जब लोगों को किसी ना किसी चीज से Attachment हो जाता है, आसक्ति हो जाती है और ये आसक्ति हमारे दुःखों का कारण बनता हैं, तो सवाल यह बनता है कि Attachment यानि आसक्ति को दूर कैसे भगाया जाए?
मैं आपको एक Idea देता हूँ, आसक्ति को हटाने के लिए आपको जिस चीज में आसक्ति है, उसमें कमियां देखनी होगी, जैसे-जैसे कमियां ढ़ँूढ़ते जायेंगें, आसक्ति कम होती जाएगी।

‘‘आप आसक्ति को हटाना चाहते है, तो आपको जिस चीज से
आसक्ति हो, उस चीज में कमियां ढ़ूँढ़ना आरम्भ करना चाहिए।

Attachment

It is said that attachment is the source of all our sorrows. Then how do we get rid of our attachments? I have an idea. Start looking for flaws in the object of your attachment. As the list of the flaws will increase, your attachment to the object will weaken.

Prof. Sanjay Biyan

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आज का विचार-‘‘डर से मुक्ति’’

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अक्सर लोग मुझसे एक सवाल पूछते है कि डर से छुटकारा कैसे पाएं? तो देखिए, जिस चिज का अस्तित्व ही नहीं है, तो उससे छुटकारा कैसे पाया जा सकता है? मुझे लगता है डर के लिए बहुत कल्पनाएं करनी पड़ती है। आप अपनी कल्पनाओं को बंद करिये और डर से मुक्ति पाइये।

‘‘डर से मुक्ति पाने के लिए अस्तित्वहीन/व्यर्थ
कल्पना को बंद करना चाहिए।’’

Freedom from fear

People often ask me of ways to get rid of fear. But how do we get rid of something that doesn’t exist? We create our fears through our imagination. Stop imagining useless stuff, and there will be no fear.

Prof. Sanjay Biyani

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आज का विचार-‘‘एकाग्रता’’

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मन…., मन यानि बहुत सारे विकल्पए जब मन बहुत सारे विकल्प में लग जाता है तो हमारी इच्छाशक्ति बहुत कमजोर हो जाती है। लेकिन यही मन जब किसी सही विकल्प पर लग जाता है तो इसे एकाग्रता कहत है। अगर हम चाहते है कि हम एकाग्र बने तो मन को किसी एक विकल्प पर लगाना होगा।

‘‘मन बहुत से विकल्प प्रस्तुत करता है,
लेकिन मन को किसी एक विकल्प पर लगा देने से एकाग्रता बढ़़ जाती है।’’

Concentration

Too many options distract us, making our performance mediocre. Our concentration increases manifold when we have only one option before us.

Prof. Sanjay Biyani

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