आज का विचार-‘‘संस्कृति’’

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दूसरे के खाने को मैं खा जाऊँ, ये प्रकृति एक प्रकार की विकृति है। दूसरा अपना खाना खाएँ मैं अपना खाना खाऊँ ये प्रकृति है, लेकिन दूसरे ने खाना नहीं खाया इसी की फिक्र करना यही हमारी संस्कृति है।

‘‘दूसरों के भोजन की भी चिंता करना हमारी संस्कृति है।’’

Culture

To cheat somebody of his rightful share (of food, property, assets etc) is not human nature. I consume my food, enjoy my assets & you consume your food, enjoy your assets – this is human nature. But we help the other person & feed his empty stomach – this is our culture.

Caring for the other is our culture.

Prof. Sanjay Biyani

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